Tajmahal ke Rahasya – ताजमहल के 5 रहस्य, जानकर चौंक जाएंगे

Tajmahal ke Rahasya

Tajmahal ke Rahasya –

ताजमहल के बंद तहखाने का डरावना रहस्य और Tajmahal ke Rahasya Mysterious Facts Of Taj Mahal in Hindi

पूरी दुनिया आज भी कई रहस्यों से भरी पड़ी है। कुछ रहस्य को सिर्फ एक कांस्पीरेसी थ्योरी कह कर छोड़ दिया जाता है, और पूछो इन देशों की सरकारी संस्थाएं आज भी छिपाने की कोशिश कर रही है। भारत में भी ऐसे कई रहस्य है जिसने दुनिया को चकरा कर रख दिया है। कई रहस्य हैं जो दुनिया के सामने आ चुके हैं, लेकिन अभी भी कई ऐसे रहस्य भी हैं, जो आज भी सब से छुपा कर रखे जा रहे हैं। ऐसा ही रहस्य है ताजमहल के तहखाने का रहस्य। यह एक ऐसा रहस्य है जिसे सब को बताने से हर सरकार डरती है। तो आज हम बात करने वाले हैं ताजमहल के उस दरवाजे के बारे में जिसे खोलने से सरकार भी डरती है Mysterious Facts Of Taj Mahal in Hindi.

ताज महल किसने बनाया यह रहस्य आज भी बरकरार है। ताजमहल शाहजहां का बनवाया हुआ मकबरा है या राजपूत राजा की ओर से मुग़ल बादशाह को तोहफ़े में दिया गया प्राचीन शिव मंदिर? 

Tajmahal ke Rahasya – ताजमहल के 5 रहस्य, जानकर चौंक जाएंगे

1. Tajmahal ke Rahasya – क्या प्रेम एक झूठ था : प्रसिद्ध शोधकर्ता और इतिहासकार पुरुषोत्तम नागेश ओक ने ताज महल के रहस्य से पर्दा उठाया है। ओक अनुसार जयपुर राजा से हड़प किए हुए पुराने महल में दफनाए जाने के कारण उस दिन का कोई महत्व नहीं? पुरुषोत्तम अनुसार क्योंकि शाहजहां ने मुमताज के लिए दफन स्थान बनवाया और वह भी इतना सुंदर तो इतिहासकार मानने लगे कि निश्‍चित ही फिर उनका मुमताज के प्रति प्रेम होना ही चाहिए। तब तथाकथित इतिहासकारों और साहित्यकारों ने इसे प्रेम का प्रतीक लिखना शुरू कर दिया। उन्होंने उनकी गाथा को लैला-मजनू, रोमियो-जूलियट जैसा लिखा जिसके चलते फिल्में भी बनीं और दुनियाभर में ताजमहल प्रेम का प्रतीक बन गया। यह झूठ आज तक जारी है। मुमताज से विवाह होने से पूर्व शाहजहां के कई अन्य विवाह हुए थे अत: मुमताज की मृत्यु पर उसकी कब्र के रूप में एक अनोखा खर्चीला ताजमहल बनवाने का कोई कारण नजर नहीं आता। मुमताज किसी सुल्तान या बादशाह की बेटी नहीं थी। उसे किसी विशेष प्रकार के भव्य महल में दफनाने का कोई कारण नजर नहीं अता। उसका कोई खास योगदान भी नहीं था। उसका नाम चर्चा में इसलिए आया क्योंकि युद्ध के रास्ते के दौरान उसने एक बेटी को जन्म दिया था और वह मर गई थी।

2. Tajmahal ke Rahasya – शहजहां और मुमताज का मकबरा : भारतीय इतिहास के पन्नों में यह लिखा है कि ताजमहल को शाहजहां ने मुमताज के लिए बनवाया था। वह मुमताज से प्यार करता था। दरअसल, इसे शाहजहां और मुमताज का मकबरा माना जाता है दुनिया भर में ताजमहल को प्रेम का प्रतीक माना जाता है, लेकिन कुछ इतिहासकार इससे इत्तेफाक नहीं रखते हैं। इतिहासकार पुरुषोत्तम ओक ने अपनी पुस्तक में लिखा हैं कि शाहजहां ने दरअसल, वहां अपनी लूट की दौलत छुपा रखी थी इसलिए उसे कब्र के रूप में प्रचारित किया गया।

3.Tajmahal ke Rahasya – सात आश्चर्यों में से एक : यमुना नदी के किनारे सफेद पत्थरों से निर्मित अलौकिक सुंदरता की तस्वीर ‘ताजमहल’ न केवल भारत में, बल्कि पूरे विश्व में अपनी पहचान बना चुका है। ताजमहल को दुनिया के सात आश्चर्यों में शामिल किया गया है।

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4.Tajmahal ke Rahasya – तेजो महालय : इतिहासकार पुरुषोत्त ओक ने अपनी किताब में लिखा है कि ताजमहल के हिन्दू मंदिर होने के 700 से अधिक सबूत मौजूद हैं। पुरषोत्तम नागेश ओक ने ताजमहल पर शोधकार्य करके बताया कि ताजमहल को पहले ‘तेजो महलय’ कहते थे। वर्तमन ताजमहल पर ऐसे 700 चिन्ह खोजे गए हैं जो इस बात को दर्शाते हैं कि इसका रिकंस्ट्रक्शन किया गया है। वास्तुकला के विश्वकर्मा वास्तुशास्त्र नामक प्रसिद्ध ग्रंथ में शिवलिंगों में ‘तेज-लिंग’ का वर्णन आता है। ताजमहल में ‘तेज-लिंग’ प्रतिष्ठित था इसीलिए उसका नाम ‘तेजोमहालय’ पड़ा था। तेजोमहालय उर्फ ताजमहल को नागनाथेश्वर के नाम से जाना जाता था, क्योंकि उसके जलहरी को नाग के द्वारा लपेटा हुआ जैसा बनाया गया था। यह मंदिर विशालकाय महल क्षेत्र में था।

पुरुषोत्तम ओक के अनुसार बादशाहनामा, जो कि शाहजहां के दरबार के लेखा-जोखा की पुस्तक है, में स्वीकारोक्ति है (पृष्ठ 403 भाग 1) कि मुमताज को दफनाने के लिए जयपुर के महाराजा जयसिंह से एक चमकदार, बड़े गुम्बद वाला विशाल भवन (इमारत-ए-आलीशान व गुम्बज) लिया गया, जो कि राजा मानसिंह के भवन के नाम से जाना जाता था। जयपुर के पूर्व महाराजा ने अपनी दैनंदिनी में 18 दिसंबर, 1633 को जारी किए गए शाहजहां के ताज भवन समूह को मांगने के बाबत दो फरमानों (नए क्रमांक आर. 176 और 177) के विषय में लिख रखा है। यह बात जयपुर के उस समय के शासक के लिए घोर लज्जाजनक थी और इसे कभी भी आम नहीं किया गया।

5. Tajmahal ke Rahasya – बाद में दफनाया था बेगम को : शाहजहां के दरबारी लेखक मुल्ला अब्दुल हमीद लाहौरी ने अपने ‘बादशाहनामा’ में मुगल शासक बादशाह का संपूर्ण वृत्तांत 1000 से ज्यादा पृष्ठों में लिखा है जिसके खंड एक के पृष्ठ 402 और 403 पर इस बात का उल्लेख है कि शाहजहां की बेगम मुमताज-उल-मानी जिसे मृत्यु के बाद बुरहानपुर (मध्यप्रदेश) में अस्थाई तौर पर दफना दिया गया था और इसके 6 माह बाद तारीख 15 मदी-उल-अउवल दिन शुक्रवार को अकबराबाद आगरा लाया गया फिर उसे महाराजा जयसिंह से लिए गए आगरा में स्थित एक असाधारण रूप से सुंदर और शानदार भवन (इमारते आलीशान) में पुनः दफनाया गया।

लाहौरी के अनुसार राजा जयसिंह अपने पुरखों की इस आलीशान मंजिल से बेहद प्यार करते थे, पर बादशाह के दबाव में वे इसे देने के लिए तैयार हो गए थे। इस बात की पुष्टि के लिए यहां यह बताना अत्यंत आवश्यक है कि जयपुर के पूर्व महाराज के गुप्त संग्रह में वे दोनों आदेश अभी तक रखे हुए हैं, जो शाहजहां द्वारा ताज भवन समर्पित करने के लिए राजा जयसिंह को दिए गए थे।

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दरअसल ऐसा माना जाता है कि Tajmahal ke Rahasya – ताजमहल का निर्माण साल 1631 शुरू करवाया गया था। और साल 1653 में बनकर तैयार हुआ। और इसे आज भी निर्माण कुशलता का एक विशाल नमूना कहा जाता है। शोधकर्ताओं ने इस पर कई शोध किए और उनका मानना है कि ताजमहल के नीचे हजार से भी ज्यादा कमरे हैं। उनका मानना है कि ताज महल जितना ऊंचा है, यह धरती के अंदर भी उतनी ही गहराई तक मनाया गया है। उस जमाने में कोई भी किला बनाया जाता था, तो उसमें से बाहर निकलने का रास्ता भी बनाया जाता था। और ऐसा ही ताजमहल के अंदर भी है, Tajmahal ke Rahasya – इसके नीचे से एक रास्ता भी है जो कहीं बाहर निकलता है। लेकिन और रहस्यमई तहखानों की तरह उस रास्ते को भी शाहजहां के समय से ही बंद करवा दिया गया।

ताजमहल के नीचे के इन कमरों को ईटो से बंद करवाया गया। लेकिन शोधकर्ताओं का मानना है कि जिन ईटो से तहखाने को बंद किया गया है इन ईटो का निर्माण इन कमरों के बाद किया गया। लेकिन आखिर क्या वजह थी जो इन कमरों को बनाने के बाद इन्हें बंद करना पड़ा। कुछ पुरातत्व विज्ञान और शोधकर्ताओं कि इस पर अलग-अलग राय है। कुछ का मानना है कि इन तहखानों में मुमताज महल की कब्र को रखा गया है, और उन कमरों को सरकारी तौर पर बंद किया गया है। लेकिन ऐसा क्यों किया गया है? इसकी पूरी जानकारी किसी के भी पास नहीं है।

कुछ पुरातत्व शास्त्री और लेखकों का यह कहना है कि इस जगह पर पहले एक शिव मंदिर था। और उसे तेजो महालय कहा जाता था। बाद में उसके ऊपर ताजमहल का निर्माण करवाया गया, इसलिए यह तहखाने ताज महल से भी पुरानी है। लेकिन अब एक नई कांस्पीरेसी थ्योरी सामने आ रही है, जिसके अनुसार ताजमहल के नीचे इन तहखानों में कीमती खजाने भी हो सकते हैं। क्योंकि मेटल डिटेक्टर से इनके नीचे कई तरह की धातुएं होने की पुष्टि हुई है। लेकिन पुरातत्व शास्त्रियों का यह भी मानना है कि इसके अंदर कई ऐसे ऐतिहासिक दस्तावेज भी हो सकते हैं जो हमारे इतिहास तक को बदल सकते हैं। इन तहखानों की खोजबीन की खबरें तो काफी आई, लेकिन इसे कभी खोला नहीं जा सका। इनमें से कई दरवाजे तो खोले गए लेकिन बाद में बंद कर दिए गए, जिससे यह रहस्य और भी गहरा जाता है। ताजमहल के इन दीवारों के पीछे क्या है? Mysterious Facts Of Taj Mahal in Hindi जिसे जानने से सरकार भी डरती है।

अंत में हमारे मन में भी यही सवाल उठता है कि आखिर इन दरवाजों के पीछे क्या है? Tajmahal ke Rahasya – जिसे सरकार भी हमसे छुपाए रखना चाहती हैं, और क्या सच में इसमें कुछ ऐसा है जो हमारा इतिहास बदल सकता है? एक ना एक दिन तो सच्चाई सामने आएगी ही, क्योंकि कहा जाता है कि सच्चाई को छुपाया जा सकता है लेकिन दबाया नहीं जा सकता। और हर सच एक न एक दिन सामने आ ही जाता है।

Mysterious Facts Of Taj Mahal in Hindi:

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