भारत और चीन के बीच मैक मोहन रेखा का रहस्य

भारत और चीन के बीच मैक मोहन रेखा का रहस्य

दोस्तों भारत और चीन के बीच मैक मोहन रेखा का रहस्य जानकर आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।

मैक मोहन रेखा इस रेखा की लंबाई 890 किलोमीटर है। यह रेखा भारत और चीन के बीच स्पष्ट सीमा रेखा का निर्धारण करती है। लेकिन चीन इस रेखा को नहीं मानती है इसीलिए भारत और चीन के बीच विवाद का विषय बना रहता है। इस रेखा का निर्धारण सर हेनरी मैक मोहन ने किया था। सर हेनरी मैकमोहन तत्कालीन ब्रिटिश भारत सरकार में विदेश सचिव रहे थे।

दोस्तों भारत और चीन मैक मोहन रेखा पर विवाद कहां कहां रहता है। आइए जानते हैं।

भारत और चीन विवाद मैक मोहन रेखा अरुणाचल सिक्किम, अक्साई चिन मैं हमेशा विवाद रहते हैं।

दोस्तों चीन एक ऐसा देश है जो चाहता है की वह पूरी दुनिया मैं सिर्फ चीन की बादशाही कायम हो जाए। औपनिवेशिक काल का समय दोबारा आ जाए. चीन हमेशा अपने सभी पड़ोसी मुल्कों से स्थल सीमा और जल सीमा पर हमेशा विवाद करता आ रहा है. आइए दोस्तों आज अब जानते हैं कि भारत और चीन के बीच मैक मोहन रेखा का रहस्य और इससे उपजे हुए विवादों के बारे में जानते हैं.

भारत और चीन के बीच मैक मोहन रेखा क्या है? ( What is McMahon Lines)

दोस्तों मैक मोहन रेखा चीन अधिकृत और भारतीय क्षेत्रों पूर्वी हिमालय क्षेत्र के बीच सीमा चिन्हित है। यह हिमालय क्षेत्र अत्यधिक ऊंचाई का पर्वतीय स्थान है. और इस रेखा का निर्धारण भारतीय सरकार विदेश सचिव सर हेनरी मैक मोहन तत्कालीन ब्रिटिश भारत सरकार ने किया था और इनके ही नाम पर इस रेखा का नाम भी मैक मोहन रखा गया था इस रेखा की लंबाई 890 किलोमीटर है. दोस्तों यह रेखा शिमला समझौता 1914 का परिणाम है. जो की भारत और तिब्बत के बीच हुआ था. लेकिन चीन अभी भी इस रेखा को नहीं मानता है.

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आइए आप जानते हैं?

शिमला समझौता क्या है? (Shimla Agreement)

दोस्तों भारत और तिब्बत के प्रतिनिधियों के बीच 1914 मैं यह समझौता स्पष्ट सीमा निर्धारण के लिए हुआ था। तब इसमें चीन मौजूद नहीं था क्योंकि उस समय तिब्बत एक स्वतंत्र देश हुआ करता था। इसी कारण भारत और तिब्बत के प्रतिनिधियों के बीच इस हस्ताक्षर पर तिब्बत ने हस्ताक्षर किए थे।

इसी कारण भारत और चीन के बीच मैक मोहन रेखा खींची गई थी यह रेखा शिमला समझौता के अनुसार खींची गई थी। भारत और ब्रिटिश शासकों ने अरुणाचल प्रदेश के तवांग और तिब्बत के दक्षिणी से को पूरा हिंदुस्तान का हिस्सा माना था और जिसके लिए तिब्बतियों ने भी हस्ताक्षर पर सहमति दी थी। इसी कारण अरुणाचल प्रदेश का तवांग क्षेत्र भारत भूमि का हिस्सा बन गया था।

भारत और चीन के बीच मैक मोहन रेखा का रहस्य
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चीन मैक मोहन रेखा को क्यों नहीं मानता है?

चीन का कहना है की तिब्बत हमेशा चीन का हिस्सा रहा है। इसीलिए चीन कहता है की तिब्बत के प्रतिनिधि उसकी मर्जी के बिना कोई भी समझौता नहीं ले सकता है। चीन ने सन 1950 में तिब्बत पर अपना पूरी तरह से कब्जा कर लिया था। अब चीन नहीं तो तिब्बत के समझौते को समझता है और चीन ना तो मैक मोहन रेखा को मानता है नहीं तिब्बत हस्ताक्षर समझौते को स्वीकार करता है।

अब चीन का यह कहना है कि शिमला समझौते में चीन शामिल नहीं हुआ था। इसीलिए चीन कहता है की शिमला समझौते के बीच बाध्य डालने से चीन को कोई नहीं रोक सकता। चीन ने 1950 में तिब्बत पर कब्जा कर लिया था। अब अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा जताना शुरू कर दिया है।

मैक मोहन रेखा पर भारत का पक्ष?

भारत सरकार का मानना है की सन 1914 में मैक मोहन रेखा तय हुई थी. तब तिब्बत एक कमजोर देश स्वतंत्र देश हुआ करता था. इसी कारण तिब्बत को अपने देश की सीमा पर समझौता करने का पूरा हक बनता है। अर्थात भारत के अनुसार यह मैक मोहन रेखा भारत द्वारा खींची गई थी। उस समय चीन का शासन तिब्बत पर नहीं हुआ करता था। इसी कारण को एक स्वतंत्र देश था। इसीलिए मैक मोहन रेखा ही भारत और चीन के बीच इस पर सीमा रेखा मानी जाएगी। 1950 के बाद तिब्बत ने अपनी स्वतंत्रता खो दी और इसके बाद तिब्बत का वह क्षेत्र भारत के नियंत्रण में आ गया। इसी प्रकार चीन कहता है कि तवांग हमारा है लेकिन इस प्रकार तवांग चीन का दावा एकदम गलत है।

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भारत और चीन के बीच मैक मोहन रेखा का रहस्य

भारत और चीन मैक मोहन रेखा की स्थिति इस समय क्या है?

भारत चीन मैक मोहन रेखा को भारत सरकार मैक मोहन रेखा को मान्यता देता है और इसे भारत और चीन के बीच ‘एक्चुअल लाइन ऑफ कंट्रोल’ (LAC) मानता है. जबकि मैक मोहन रेखा को चीन मान्यता नहीं देता है. चीन का कहना है की 2000 किलोमीटर क्षेत्रफल विवादित क्षेत्र है. जबकि भारत का कहना है की 4000 किलोमीटर क्षेत्रफल है.

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खास करके विवाद अरुणाचल प्रदेश के तवांग में भारत और चीन के बीच विवाद होते हैं. जिस कारण चीन दक्षिणी तिब्बत कहकर अपना हिस्सा मानता है. जबकि 1914 मैं शिमला समझौते के अनुसार यह हिस्सा भारतीय राज्य मैं है। इसी प्रकार यह स्पष्ट होता है कि चीन लगभग हर उसी संधि को नकरता आ रहा है. जिसे उसने कम्युनिस्ट क्रांति होने से पहले मंजूरी दी गई थी. तो दोस्तों यह था भारत और चीन के बीच मैक मोहन रेखा का रहस्य.

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