निधिवन का रहस्य । Nidhivan Ka Rahasya

निधिवन का रहस्य - Nidhivan Ka Rahasya

दोस्तों आपने निधिवन के बारे में अवश्य सुना होगा। क्या आज आप निधिवन का रहस्य के बारे में जानना चाहते हो। तो आइए दोस्तों जानते हैं निधिवन का रहस्य (Nidhivan Ka Rahasya).

निधिवन एक अत्यंत पवित्र स्थान है, यह रहस्यमयी धार्मिक नगरी वृंदावन में स्थित है। मान्यता है की अर्धरात्रि को निधिवन में भगवान श्री कृष्ण एवं श्री राधा आज भी निधिवन में रास रचाते हैं। कुछ जानकारी के अनुसार भगवान श्री कृष्णा रास के बाद निधिवन परिसर में रंग महल में शयन करते हैं। आज भी परिसर के रंग महल में भगवान श्री कृष्ण और राधा के लिए प्रसाद माखन मिश्री प्रतिदिन रखा जाता है।

इस रंग महल का रहस्य अद्भुत है, आइए जानते हैं। (Nidhivan Ka Rahasya).

निधिवन का रहस्य – Nidhivan परिसर के रंग महल मैं भगवान श्री कृष्णा के लिए शयन पलंग लगाया जाता है। कहते हैं की सुबह शयन पलंग के बिस्तरों से प्रेरित होता है, की निश्चित रूप से यहां रात्रि को कोई विश्राम करने आया था और प्रसाद माखन मिश्री को भी ग्रहण किया करते हैं।

निधिवन में रात्रि कृष्णा राधा की रासलीला देख और सुन नहीं सकता।

जानकारी के अनुसार कहते हैं की भगवान श्री कृष्णा व राधा की निधिवन मैं रात्रि रासलीला को देखने वाला अंधा या उसको कुछ दिखाई भी नहीं देता। गूंगा, बहरा, यहां पागल हो जाता है। ताकि वह इस रासलीला के बारे में किसी को बताना सके।

Also Read: माइकल जैक्सन के जीवन का रहस्य माइकल जैकसन ने सर्जरी

निधिवन के वृक्षों का रहस्य, आइए जानते हैं।

वृंदावन नगरी में निधि वन लगभग दो ढाई एकड़ क्षेत्रफल में फैला हुआ है। निधिवन के वृक्षों की खास बात यह है कि किसी भी वृक्षों के तने आपको सीधे देखने को नहीं मिलेंगे। और निधिवन के वृक्ष की डालिया हमेशा नीचे की ओर झुकी और आपस में गुथी हुई प्रतीत रहती है।

Nidhivan परिसर मैं दर्शनीय स्थान कौन-कौन से हैं? आइए जानते हैं।

दोस्तों निधिवन परिसर में धुपद के जनक श्री स्वामी हरिदास जी की जीवित समाधि है, और संगीत सम्राट की जीवित समाधि है। रंग महल बांके बिहारी जी का प्राकटय स्थल भी है और राधा रानी बंसी चोर आदि दर्शनीय स्थान मौजूद है।

निधिवन मैं गीली दातुन का रहस्य आइए जानते हैं। (Nidhivan Ka Rahasya).

कहते हैं रात्रि 8:00 बजे के बाद परिसर में दिनभर दिखाई देने वाले बंदर निधिवन से चले जाते हैं, और पशु पक्षी मंदिर के पुजारी वह भक्त सभी चले जाते हैं। रात्रि को निधिवन में कोई नहीं रुकता है।

Nidhivan परिसर के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया जाता है। मान्यता है कि अगर रात्रि निधिवन में कोई रुक जाता है वह सांसारिक बंधन से मुक्त हो जाता है। जो मुक्त हो गए हैं, उनकी निधिवन में समाधिया बनी हुई है।

निधिवन में 16000 वृक्ष आपस में गूथे हुए देख पाएंगे। 16000 वृक्ष रात में भगवान श्री कृष्ण की 16000 रानियां बनकर कृष्णा के साथ रास रचाते है।

रास के बाद भगवान श्री कृष्ण व राधा रंग महल में विश्राम करते हैं। और सुबह 5:30 बजे रंग महल का जब पट खोला जाता है। तो रंग महल में कृष्णा व राधा के लिए दातुन रखा होता है, वह दातुन गीला मिलता है। जैसे कोई रात को रंग महल के पलंग पर विश्राम किया होगा। और सामान बिखरा हुआ मिलता है।

निधिवन के रहस्य का असली कारण क्या है आइए जानते हैं

वास्तु गुरु कुलदीप सालुजा के अनुसार निधिवन के रहस्य का असली कारण निधिवन का वास्तु ही कुछ ऐसा है की निधिवन रहस्यमई जैसा लगता है। निधिवन के परिसर का मुख्य द्वार पश्चिम दिशा में है। और अनियमित आकार के निधिवन के चारों तरफ पक्की चारदीवारी है। परिसर का पूर्व दिशा तथा पूर्व ईशान कोण दबा हुआ है। दरअसल 16000 वृक्षों की बात की जाती है उसमें से परिसर का आकार इतना छोटा है कि 1600 भी मुश्किल से होंगे और छतरी की तरफ फैले हुए कम ऊंचाई के वृक्ष की शाखाएं इतनी मोटी और मजबूत भी नहीं है कि दिन में दिखाई देने वाले बंदर रात्रि में विश्राम के लिए यहां से चले जाते हैं।

दोस्तों कुछ लोग निधिवन के रहस्य को मानते हैं लेकिन कुछ लोग नहीं मानते हैं। दरअसल हकीकत क्या है आज तक कोई नहीं जान पाया है। यह लोगों की मन गणित बातें हैं

उम्मीद है दोस्तों कि आपको यह (Nidhivan Ka Rahasya) आर्टिकल जरूर पसंद आया होगा। तो हमारे ब्लॉक के साथ बने रहिए। और कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए। कि आपको आर्टिकल कैसा लगा।

धन्यवाद

Also Read: भारत से जुड़े 15 गजब के रोचक तथ्य

2 thoughts on “निधिवन का रहस्य । Nidhivan Ka Rahasya”

  1. Pingback: Sarkari Naukri 2020: 8575 class-IV ke ke Padon per nikali Vecancy. Aavedan Kare » Job

  2. Pingback: Invest In Stock Market - Stock Market में निवेश कि शुरुआत करें » Share Market

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: